गुरुवार, 13 जून को सोशलिस्ट इक्वालिटी पार्टी और वर्ल्ड सोशलिस्ट वेब साइट के अंतरराष्ट्रीय संपादकीय बोर्ड की ओर से यह चिट्ठी वॉशिंगटन डीसी में यूक्रेन के राजदूत ओक्साना मारकारोवा को सौंपी जाएगी।
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नेल्ली जनसंहार में भारत की मौजूदा सत्तारूढ़ हिंदू बर्चवस्ववादी बीजेपी ने बड़ी भूमिका निभाई थी. बांग्लादेश से आए बेहद ग़रीब विस्थापित शरणार्थियों के ख़िलाफ़ "अवैध विदेशी" के नाम पर बड़े पैमाने पर सामप्रदायिक भड़काऊ अभियान के कारण यह जनसंहार हुआ था.
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सरकार विरोधी मज़दूर वर्ग के प्रदर्शनों के बीच भारत की सत्तारूढ़ धुर दक्षिणपंथी बीजेपी को विधानसभा चुनावों में बढ़त
केंद्र शासित समेत भारत के पांच प्रदेशों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे चार मई को घोषित हुए, जो पूंजीवादी शासन के गहराते संकट और मज़दूर वर्ग को क्रांतिकारी सामाजवादी कार्यक्रम और रणनीति से लैस करने की तात्कालिकता की ओर संकेत करते हैं।
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ईरान जंग का असर बढ़ने के साथ ही मोदी ने भारतीय मज़दूरों और मेहनतकशों से और 'त्याग' करने की मांग की
ईरान पर अमेरिका-इज़राइल के ग़ैरक़ानूनी युद्ध के कारण बढ़ते आर्थिक संकट के जवाब में, ऊर्जा और फ़र्टिलाइज़र ख़पत कम करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के कुछ दिन बाद ही, भारत की घोर दक्षिणपंथी बीजेपी सरकार ने पेट्रोल डीज़ल के दाम बढ़ा दिए।
इस डॉक्यूड्रामा फ़िल्म को बैन करना, उस रिश्ते की गहराई को दिखाता है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हिंदू वर्चस्ववादी सरकार और हत्यारी जॉयनिस्ट नेतन्याहू सरकार के बीच बना है।
आसमान छूते किराए, सुविधाएं और खाने पीने की चीजों में महंगाई से निपटने के लिए असंगठित क्षेत्र के दसियों हज़ार मज़दूर, मज़दूरी में भारी बढ़ोत्तरी की मांग कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश की पुलिस पूरे देश में राजनीतिक कार्यकर्ताओं को सिर्फ़ इसलिए गिरफ़्तार कर रही है क्योंकि वे नई दिल्ली के पास हुए हालिया मज़दूर प्रदर्शन का समर्थन कर रहे थे।
जंग का तत्काल असर सीधे तौर पर भारत के लिक्विड पेट्रोलियम गैस सप्लाई पर पड़ा है लेकिन इसका परिणाम पूरी अर्थव्यवस्था पर फ़ैलने और महंगाई को बढ़ाने का ख़तरा पैदा कर रहा है, ख़ासकर खाने पीने की चीज़ें और यातायात की लागत बढ़ेगी.
भारत का नया लेबर कोड (श्रम संहिताएं) वेतन तय करने, नौकरी सुरक्षा और काम के हालात को लेकर क़ानूनी सुरक्षाओं को ध्वस्त करता है और नाटकीय रूप से हड़ताल करने के मज़दूरों के क़ानूनी अधिकार को सीमित करता है।
डब्ल्यूएसडब्ल्यूएस लोरा सांताकुमार की तुरंत बहाली और बदले की कार्रवाई के डर के बिना युद्ध का विरोध करने के उनके अधिकार, और सभी अकादमिक लोगों, यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों और छात्रों के अधिकारों की रक्षा की मांग करती है।
मोदी सरकार ग्रामीण रोज़गार 'गारंटी' को रद्दी की टोकरी में फेंक रही है, जिससे सत्ताधारी वर्ग के सबसे लालची उस तबके की मांग पूरी हो रही है, जो लंबे समय से इसकी लागत का रोना रोता रहा है और शिकायत करता रहा है कि इसने ग्रामीण 'मज़दूरी' को बढ़ा दिया है।
रूस के साथ अपनी दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी की “गर्मजोशी“ और “मजबूती“ का भारत का जोर शोर से प्रदर्शन करना वॉशिंगटन को ये संदेश था कि नई दिल्ली अमेरिका को, मॉस्को के साथ रिश्ते को तय करने की इजाज़त नहीं देगा।
श्रीलंकाई राष्ट्रपति की आपातकाल की घोषणा का उद्देश्य लोगों की जान बचाना नहीं, बल्कि संभावित सामाजिक अशांति को दबाना है
अधिकांश भारतीय निर्यातों पर ट्रंप प्रशासन की ओर से थोपे गए 50 प्रतिशत टैरिफ़ ने महज तीन महीनों के अंदर ही तमाम उद्योगों में विनाशकारी रूप से नौकरियों पर गाज़ गिरा दी है।
एक सहकर्मी वर्कर ने कहा, "चाहे हमें कष्ट हो, चाहे घायल हों या विजयकुमार की तरह मशीन में फंस कर मर ही क्यों न जाएं- उनको इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। वो बस चाहते हैं कि हम ऐसे ही मरते रहें ताकि वे पैसा बना सकें।"

न्यूयॉर्क में ममदानी की जीत में राजनीतिक और वर्गीय मुद्दे
ममदानी के चुनाव प्रचार अभियान के लिए समर्थन, मज़दूरों और युवाओं के बीच एक वामपंथी झुकाव को दिखाता है, लेकिन ममदानी का प्रोग्राम, कुलीनतंत्र और तानाशाही के ख़िलाफ़ लड़ाई में आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं सुझाता।
भारत पाकिस्तान संघर्ष से परमाणु विनाश का ख़तरा
भारत और पाकिस्तान, दक्षिण एशिया के दो प्रतिद्वंद्वी परमाणु हथियार संपन्न शक्ति हैं और एक दूसरे के ख़िलाफ़ पूर्ण युद्ध की कगार पर हैं। अगर ऐसा संघर्ष होता है तो यह बहुत ही विनाशकारी होने वाला है, केवल इस क्षेत्र के दो अरब लोगों के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए।
ट्रंप प्रशासन का एक महीनाः कुलीन तंत्र बनाम मज़दूर वर्ग
पिछले चार हफ़्तों की परिघटनाओं ने साबित किया है कि ट्रंप की वापसी, असल में अमेरिकी समाज के कुलीन तंत्र वाले चरित्र के साथ कदमताल करने के लिए राजनीतिक अधिरचना में जबरिया फेरबदल का प्रतिनिधित्व करती है।
युद्ध फ़ासीवाद और कुलीनतंत्र के ख़िलाफ़ समाजवाद
पूंजीवादी व्यवस्था के अंतरसंबंधित संकट के पीछे एक कुलीनतंत्र है, जो पूरे समाज को अपने लाभ और निजी दौलत इकट्ठा करने के लिए अपना ग़ुलाम बना लेता है। इस कुलीनतंत्र के ख़िलाफ़ संघर्ष, अपनी प्रकृति में ही एक क्रांतिकारी कार्यभार है।
